
शनिवार शाम ग्वालियर के एक अस्पताल में कोरोना वॉरियर्स कहे जाने वाले डॉक्टर वॉरियर्स में तब्दील हो गए कमलाराजा हॉस्पिटल में डॉक्टरों का अमानवीय चेहरा सामने आया है। जयारोग्य समूह का कमलाराजा हॉस्पिटल एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार ऑक्सिजन की कमी की वजह से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की मनमानी और उनके परिवार वालों पर डंडे बरसाना कारण है। यहां दो महिलाओं की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा हो गया। महिलाओं के परिवारवालों को डॉक्टरों ने अस्पताल में दौड़ा-दौड़ाकर डंडों से पीटा।

हद तो उस समय हो गई, जब डॉक्टरों ने मारपीट के बाद अपनी ही सुरक्षा की मांग कर डाली। पीटने वाले लोगों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने मौत के बाद डेथ सर्टिफिकेट की मांग की थी। डॉक्टरों की मारपीट का वीडियो वहां मौजूद किसी युवक ने बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
यह सारा घटनाक्रम ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल की है। शनिवार शाम को इस अस्पताल में दो महिलों की मौत हो गई। पहली मौत जब हुई तब परिजनों ने डॉक्टरों पर मरीज़ को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दिए जाने का आरोप लगाया। परिजनों के हंगामे के बाद अस्पताल में पुलिस बुला ली गई। इसके थोड़ी ही देर बाद एक अन्य महिला की भी मौत हो गई। मृतक रजनी के परिजनों ने जब डॉक्टरों से डेथ सर्टिफिकेट मांगी, तब वे इतने आग बबूला हो गए कि मृतक के परिजनों पर ही बरस गए।
पहले तो परिजनों और डॉक्टरों में जमकर बहस हुई लेकिन थोड़े ही अंतराल के बाद इस बहस को झगड़े में तब्दील होते देर नहीं लगी। मौके पर मौजूद डॉक्टर ने फोन कर साथियों को बुला लिया। वहां कई जूनियर डॉक्टर हाथों में डंडे लेकर पहुंच गए। मृतक महिला के भाई, बहन और अन्य परिजन को डंडों से पीटा गया। इतना ही नहीं, अस्पताल में डॉक्टर हंगामा करते हुए नजर आए और परिजन को पीटते रहे। हैरानी भरी बात यह थी कि इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस भी अस्पताल में मौजूद थी। लेकिन वह भी बीच बचाव नहीं कर सकी।
मारपीट के दौरान पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद थी। बीच-बचाव करने पर पुलिस से भी झूमाझटकी हुई। सूचना मिलने के थोड़ी देर बाद ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी वहां पहुंच गए। लेकिन इसके बाद बावजूद डॉक्टरों के तेवर कम नहीं हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे अजीब बात यह हुई कि खुद लाठी डंडे लेकर असहाय परिजनों पर बरसने वाले डॉक्टर ऊर्जा मंत्री से खुद की सुरक्षा की मांग करने लगे।बाद में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी में ही परिजन मृतक के शव को अस्पताल से ले जा सके।
