
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 की मौजूदा स्थिति पर स्वत: संज्ञान लिया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देश को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन की आपूर्ति और आवश्यक दवाओं के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया. सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि कि अदालत इस मामले की सुनवाई कल करेगी.
सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कोविड पर एक राष्ट्रीय योजनाबनाकर इसे पेश करने या सूचित करने के लिए कहा.कोर्ट ने हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने चार अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार से नेशनल प्लान मांगा है. इसमें पहला- ऑक्सीजन की सप्लाई, दूसरा- दवाओं की सप्लाई, तीसरा- वैक्सीन देने का तरीका और प्रक्रिया और चौथा- लॉकडाउन करने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार को हो, कोर्ट को नहीं. अब मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल यानी कल होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में छह अलग-अलग हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है, इसलिए ‘कंफ्यूजन और डायवर्जन’ की स्थित है. दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, कलकत्ता, इलाहाबाद और ओडिशा- 6 हाई कोर्ट में कोरोना संकट पर सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने की बेंच ने कहा कि, ‘यह ‘कंफ्यूजन और डायवर्जन’ कर रहा है, एक हाई कोर्ट को लगता है कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता है, एक को लगता है कि उनका अधिकार क्षेत्र है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट के लॉकडाउन वाले आदेश का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह नहीं चाहती कि हाई कोर्ट ऐसे आदेश पारित करें. सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा, ‘हम राज्य सरकारों के पास लॉकडाउन की घोषणा करने की शक्ति रखना चाहते हैं, न्यायपालिका द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.’
