सीधी। पत्नी को कुल्हाड़ी मार कर हत्या करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा व एक हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है अर्थ दण्ड की राषि जमा न करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुग्ताए जाने फैसला श्रंखला न्यायालय रामपुर नैकिन के विद्वान न्यायाधीष आर पी कतरौलिया ने सुनाया है।सुनाए गये फैसले की हांसिल जानकारी के अनुसार रामपुर नैकिन थाना के खड्डी चैकी अंतरगत अहिरान टोला गांव निवासी संतोष सिंह गोंड़ पिता ठाकुर सिंह गोड़ पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था आये दिन बिवाद करता रहता था घटना दिनांक 24जून 2019 को दिन के साढ़े 11 बजे के लगभग सभी घर के सभी सदस्य भोजन के बाद अपने अपने कमरे मे सोये थे प्रेमवती अपने बेटे रामबहादुर के पास रखी चारपाई मे जाकर सो गई प्रेमवती सो गई थी लेकिन रामबहादुर जग रहा था तभी आरोपी संतोष सिंह टांगी लेकर पहुंचा और सीधे अपनी पत्नी के गले मे भरपूर बार कर दिया जिससे एक चींख निकलने के बाद प्रेमवती की मौत हो गई,उधर प्रेमवती की चीख सुनकर रामबहादुर सिंह जव मां की तरफ देखा तो उसके पिता संतोष सिंह टांगी लेकर भाग रहा था जब तव वह चारपाई से उठकर मां के पास पहुंचा तव तक आरोपी भूसावाले घर मे टांगी छिपाकर भाग गया घटना के समय आरोपी की बेटी ललिता सिंह पुत्रवधु रीना सिंह जो दूसरे कमरे मे सोये थे चींख सुनकर पहुंचे मां को मृत देख चीख पुकार करने लगे इसी दौरान गांव के सत्यदेव सिंह को बुलाकर ले आये तो उन्होने डायल 100 पुलिस को सूचित किया जिसके बाद पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद आरोपी की तलास कर हत्या मे प्रयुक्त टांगी बरामद कर उसके खिलाफ हत्या की धारा 302 का प्रकरण दर्ज कर न्याय के लिये प्रकरण न्यायालय में पेष किया तो प्रकरण रामपुर नैकिन से उपार्पण कर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीष सीधी व श्रंखला न्यायालय रामपुर नैकिन भेजा गया जहां अपर सत्र न्यायाधीष आर पी कतरौली की अदालत ने सुनवाई की है। न्यायालय मे शासन की तरफ से अतिरिक्त लोक अभियोजक आदित्य प्रताप सिंह ने 8 साक्षियों का कथन कराकर आरोपी को दोषी प्रमाणित कराया है। श्रंखला न्यायालय ने दोनो पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी संतोष पर लगे आरोप प्रमाणित पाये जाने पर उसे हत्या की धारा 302 भा द सं के तहत आजीवन कारावास के दण्ड से दण्डित करते हुए एक हजार रूपये अर्थदण्ड अधिरोपित किया है अर्थदण्ड की राषि जमा नही करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुक्ताए जाने का फैसला सुनाया है।
